गुलाब के फूल लिए वो लड़की
गुलाब के फूल लिए वो लड़की
उस राह पर मुझे अक्सर मिलती है
धुप हो या बारिश , या हो कड़क दिल्ली की सर्दी
नहीं जाता एक भी दिन ऐसा की वो इंतज़ार न करती हो
उसका डेरा है उस ट्रैफिक सिग्नल पर जहाँ हमरे देश के बुद्धिजीवी निकलते हैं
वो इंतज़ार करती है, हाँ वो इंतज़ार करती है
गुलाब के फूल लिए हाथों में हर दिन वो इंतज़ार करती है
यही कोई आठ दस साल की होगी वो
धुप में खड़े रह रह कर रंग भी थोड़ा पक्का सा हो गया है
कई बार तो बिना चप्पलों के वो इंतज़ार करती है
हाँ गुलाब के फूल लिए वो इस ट्रैफिक सिग्नल पर इंतज़ार करती है
इंतज़ार करती है वो उस बत्ती का , जिसके जलने पर उसके जीवन का थोड़ा अंधकार कम होता है
वो बत्ती जिस से हर दिल्ली वाला चिढ़ता है हाँ वो इंतज़ार करती है उस लाल बत्ती के होने का
वो लड़की हाथों में गुलाब के फूल लिए इंतज़ार करती है
एक एक रुकी गाडी के शीशे को खटखाते हुए
किसी की गाली, किसी के ताने खाते हुए वो इस बड़ी कार से उस बड़ी कार के शीशे गिरने का इंतज़ार करती है
हाँ वो लड़की हाथों में फूल लिए इंतज़ार करती है
वो रोड के फुटपाथ के बीच में अपने 1-2 साल के भाई को बिठाकर रखती है
और बत्ती हरी होने पर उसके पास बैठ कर, उसे पानी पिला, उसकी हवा करती है
हवा कर के वो फिर उस ट्रैफिक सिग्नल की लाल बत्ती का इंतज़ार करती है
हाँ वो लड़की हाथों में गुलाब के फूल लिए इंतज़ार करती है,
वक़्त होता है उस लड़की के चेहरे को देखने आ , जब कोई हाथ बढ़ा उससे फूल मांग लेता है,
ना जाने कितने पंख लग जाते हैं उसके पाऊं में जब उसका एक गुलदस्ता बिकता है
मुझे तभी पता चलता है उस ज़रा सी बच्ची के मन में अभी भी एक बचपन जिन्दा है
जो हर पल उसके इंतज़ार के ख़त्म होने का इंतज़ार करता है
हाँ वो लड़की हाथों में गुलाब के फूल लिए इंतज़ार करती है
वक़्त कुछ अजीब था, अपनी नयी मिली खुशियों में मैं मस्त था,
साथ था हमसफ़र मेरे और उस शाम का मौसम भी हसीं था,
तभी उस ट्रैफिक सिग्नल वाली लड़की ने मेरी कार के शीशे को खटखटा दिया
उतर आया जमीन पर मैं उसने एक फूल के साथ हज़ारों दुआओं का गुलदस्ता पकड़ा दिया,
हाँ पता है मुझे, दिल्ली में ये सुनी सुनाई कहानी हर रोज़ बोली जाती है,
पर उस ट्रैफिक सिग्नल पे गुलाब के फूल हाथों में लिए वो लड़की भी तो रोज़ आती है
चिल चिलाती धुप हो, या दिल्ली की रात का अँधेरा
उस लड़की का इंतज़ार ख़त्म नहीं होता
बड़ी बड़ी लाखों करोड़ों की कारों के, बीच बचती बचाती
हर दिन करती है वो
हाँ वो ट्रैफिक सिग्नल पर हाथों में गुलाब के फूल लिए इंतज़ार करती है ।
लेखक : यशपाल सिंह
P.S: Every day i see small kids running around on posh Delhi roads, all ministers, Big NGO headquarters are here but no one cares.