My Hindi poem 13: मैं तो खुद तेरे सा अच्छा बनना चाहूँ

The content reflects a heartfelt desire to emulate the innocence and purity of a loved one, seeking a childlike simplicity and purity in thoughts and actions. The author implores for a mind akin to that of a child, free from impurities and with an understanding of both self and others.

My Hindi Poem 10: बहुत दिन हुए मुझे गांव गए

#hindi-poem बहुत दिन हुए मुझे गांव गए,हाँ बहुत दिन हुए मुझे गावो गए।पता नहीं मेरे गावों का रास्ता अब मुझे याद करता भी होगा या नहीं,सुना है वो कच्ची पगडंडियां अब पक्की सड़क बन गयी,मेरे गावों को जाने वाली अब…

My Hindi Poem 9: तुम हो तो इस जिंदगी में सब कुछ है

तुम हो तो इस जिंदगी में सब कुछ है,तुम नहीं तो कुछ नहीं, कुछ भी नहीं.तुम हो तो इन होठों पर हंसी है,जो तुम नहीं तो ये हंसी भी नहीं,रास्तों पर चलना भी हमे है आता,बहते दरिया का रास्ता बदलने…

My Hindi Poem 8: अगर कभी हार जाऊं तो..

अगर कभी हार जाऊं तो लोगों को बताना, की मैं कितना लड़ा था,अपने मन की करने, हर सांस जिया था,चुन चुन कर अपनी कमियां दूर की थी,यूँही नहीं मैं इतना दूर तक चला था,अगर कभी हार जाऊं तो लोगों को…

My Hindi Poem 2: – ना जाने क्यों |

ना जाने क्यों हम कुछ लिखते वक़्त उसको पढ़ने वालों के बारे में सोचते हैं,जब भी कुछ करना चाहते हैं तो उस काम को देखने वालों के बारे में सोचते हैं,कुछ बुरा करो तो ये सोचना जायज़ भी है,हम लोग तो…

My Hindi Poem 1: यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते

यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते    यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते सालों साल परिश्रम करते हैं रोते हैं, नींद खोते हैंलड़ते लड़ते जीते हैं यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं कई बार…