My Hindi Poem 2: – ना जाने क्यों |

ना जाने क्यों हम कुछ लिखते वक़्त उसको पढ़ने वालों के बारे में सोचते हैं,जब भी कुछ करना चाहते हैं तो उस काम को देखने वालों के बारे में सोचते हैं,कुछ बुरा करो तो ये सोचना जायज़ भी है,हम लोग तो…