अगर कभी हार जाऊं तो लोगों को बताना, की मैं कितना लड़ा था,
अपने मन की करने, हर सांस जिया था,
चुन चुन कर अपनी कमियां दूर की थी,
यूँही नहीं मैं इतना दूर तक चला था,
अगर कभी हार जाऊं तो लोगों को बताना, की मैं कितना लड़ा था,
अगर कभी लोग कहे की मैं बिगड़ा हुआ था, लोगों को बताना मैं दिन और रात क्या करता था,
अपनों को बचाने मैं खुद कितना जलता था,
उन्हें दिखाना मेरा कमरा जहाँ मैं दिन रात पढ़ा था,
मेरी किताबों में मेरे सहेजे हुए सपने दिखाना,
अगर कभी हार जाऊं तो लोगों को बताना, की मैं कितना लड़ा था,
अगर कहें कभी कच्चे मन का था, उन्हें दिखाना हारने से पहले मैंने क्या-२ किया था,
बार बार टूटे सपने जोड़, मैं उन्हें बार बार पूरा करने में लगा था,
उन्हें बताना मेरी एक एक सफलता,
और बताना मेरी एक एक मुश्किल, जिनके आगे मैं अपनी मुस्कान लिए खड़ा था,
अगर कभी हार जाऊं तो लोगों को बताना, की मैं कितना लड़ा था,
वो ये भी कहेंगे कभी मुझे मंदिर जाते नहीं देखा,
भगवान् में मन लगाते नहीं देखा,
उन्हें मेरे पढ़े गीता और वेद दिखाना,
उन्हें मेरे सारे जतन दिखाना, की हारने से पहले मैंने कोई कमी नहीं छोड़ी थी,
अगर कभी हार जाऊं तो लोगों को बताना, की मैं कितना लड़ा था |
यशपाल सिंह
०७-१०-२०१९
१२:४८