तुम हो तो इस जिंदगी में सब कुछ है,
तुम नहीं तो कुछ नहीं, कुछ भी नहीं.
तुम हो तो इन होठों पर हंसी है,
जो तुम नहीं तो ये हंसी भी नहीं,
रास्तों पर चलना भी हमे है आता,
बहते दरिया का रास्ता बदलने का अंदाज हमे आता,
तुम हो तो स्याह अँधेरी रात में पूनम की चांदनी रात को खिला दें,
जो तुम ही नहीं, तो ये रास्ते , ये जीवन दरिया, ये रौशनी कहीं नहीं.
जिंदगी जीने का मकसद, एक फ़क़ीर की इबादत,
एक रेगिस्तान में प्यासे की चाहत,
कुछ ऐसी ही है, जैसे मुझे तुम्हारी जरूरत.
तुम हो तो जिंदगी की मझधार में भी मेरे पास एक किनारा है,
जो तुम नहीं तो वो किनारा भी नहीं.
लड़खड़ाते इन क़दमों को एक, पक्की जमीन मिल गयी,
इस चेहरे पर वही एक बिंदास हंसी खिल गयी,
तुम्हारे आने के बाद मुझे इस कुदरत की इनायत का एहसास हुआ,
तुमसे पहले तो जिंदगी बस यूँ ही थी गुजर रही,
तुम्हारे आने से जैसे मेरे बचपन की मासूमियत सी है लौट आई,
जो तुम ही नहीं ये सब कुछ भी नहीं……
शुक्रिया। …..मेरी जिंदगी में आने के लिए। …
यश पाल सिंह
२३/४/२०१६