My Hindi Poem 11: मेरे शहर में लोग चेहरे पे हज़ार चेहरे लगाए बैठे हैं

मेरे शहर में लोग चेहरे पे हज़ार चेहरे लगाए बैठे हैं,
कुछ घर की दिक्कत दिखा बाहर वालों को ठगते हैं,
कुछ बाहर की दिक्कत दिखा घर वालों को ठगते हैं,
अजीब पेशा अपनाया लोगों ने,
मर्ज ठीक करने वाले यहाँ दर्द बांटते फिरते हैं,

मैं शहर में हूँ, जब दुःख होता तो रोता,
जब सुख होता तो हंसा,
जब दिल दुखा तो उदास, जब परेशान हुआ तो बदहवास दिखा,
लोगों ने बड़े गौर से देखा काफी देर तक,
फिर कहा ये रंग बदलने का हुनर तुमने जरूर बहुत ऊँची जगह से सीखा!

यशपाल सिंह
१२-०७-२०२०

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