My Curiosity | Consciousness | Indian Classical Music | Kaise Sajan Ghar Jaibay Ho Rama – Pandit Channulal Mishra sings a Chaiti by Kabir

यह कबीर का विरह गीत है, जिसमें आत्मा को अपने परमात्मा से मिलने की उत्कंठा व्यक्त की गई है। इसमें आत्मा अपनी स्थिति को भटकते हुए यात्री के रूप में देख रही है जिसे रास्ता ही समझ नहीं आता कि परमात्मा के घर (मोक्ष) कैसे पहुँचें। भीतर योग (आध्यात्मिक साधना) है पर बाहर भोग (सांसारिक मोह) लगा हुआ है। आत्मा परेशान है और कबीर जी कहते हैं — यह मार्ग कठिन है, सही राह पाना और प्रेमी परमात्मा के घर पहुँचना मुश्किल है, पर कोशिश छोड़ना नहीं चाहिए।

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Lyrics:

सांस सांस पर नाम ले बिठा
सांस मत खोवे ना जाने इस सांस का
आवन होवे ना हो
कैसे सजन घर जय हो रामा
कैसे सजन घर
जय ब हो रामा समझ ध्यान
कैसे सजन घर जय
हो रामा समझ आवे रे कैसे
सजन ग
हरी कैसे सजन घर हो राम
समझ नवे समझ ना आवे आवे आवे सजन घर
कैसे सजन
घर जय सजन घर जय
हो रामा सजन घर जय हो रामा रे से सजन ग
तन की चुनरिया
धुमिल मोरी मोरी हो गई
धुमिल मोरी हो गई
धुमिल मोरी हो गई साईं के काव
देख हो रामा साईं के का
देख हो रामा
समझ आवर कैसे
सजन घर
हरि प्रेम ने
प्रेम ने
प्रेम ने कछु जानत ना
कछु जानत ना
प्रेम प्रेम कछु जानत ना
साईं के कैसे रिझ में हो राम रे सा
साईं के कैसे रीझे
हो राम समझ न
समझ नवे
समझ ना आवे समझ
ना आवे कैसे सजन घे
समझ ना जावे
समझ ना आवे समझ ना आवे आवे रे कैसे सजन घर
हरी कैसे सजन
घर जी हर सजन घर जी हो राम
रामा रामा रे रामा रामा रामा रे तस सजन घर
हो रामा समझ ना आवे आवे रे कैसे सजन घर
कैसे सजन घर में
सज सज कहत कबीर
कहत कबीर कहत कभी कहत
कबीर कहत कबीर सुनो भाई साधु
सुनो भाई साधु सुनो भाई साधु
आ गिद्ध से नििद्ध हूं अजाती हूं अजामिल
सो गज सो गुनाह कहो खिन में गिनाऊं
शद्र हूं मैं शबरी सो काक हूं
ना केवट हूं नगा कम की नारी हूं
जो आप पगुला
राम से पुकार कहत पद्मा कर
जो हम जैसे पापी से पार नहीं पाओगे
झूठे कलंक लगी सीता सी सती त्यागी
झूठे कलंक लगी सीता सी सती त्यागी
तो सांची कलंकी हमें कैसे अपनाओगे
कैसे सजन घर गए ओ रामाय समझा ध्यान
नवे कैसे सज नगर
कहते कबीर
कहते कबीर कहते कबीर कहते कहते कहते कबीर
सुनो भाई साधु पकड़ चरण सुख प हो राम रामा
पकड़ी चरण
सुख पर हो रामा समझ ना आवे आवे कैसे सजन घर हो रामा
समझा ना आवे आवे कैसे सजन घर ज हो राम
समझ ना आवे कैसे सजन घर जय हो राम
समझ न आवे कैसे सजन घर जय जय
These lyrics reflect the spiritual and philosophical depth found in Kabir’s Chaiti.

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