My Hindi Poem 1: यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते

यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते   

यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते सालों साल परिश्रम करते हैं रोते हैं, नींद खोते हैंलड़ते लड़ते जीते हैं यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं 
यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं कई बार जानबूझ कर पेट को भूखा रखते हैंताकि भरे पेट से आने वाली नींद से दिक्क्त ना हो ,
दूसरो से ज्यादा अपनों की सुनते हैं ,
फिर भी किसी से कुछ नहीं कहते ,
यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते | 

हजारों घाव दिल पर लेते हैं, 
सब जानते हुए भी , खूब अपमानो के घूँट पीते हैं, 
हर गुज़रते दिन को रोक थोड़ा और आगे सरकते हैं ,
यूँ ही तो सपने पुरे नहीं होते हैं | 

ये जो सपने बड़े से हैं , हाँ यही तो मेरे से हैं, 
अभी दूर तो हैं, पर हमेशा पास आने को कहते हैं ,
जो दूर से इतने सुहाने हैं, पास आने पर उनकी हकीकत कैसी होगी?
हाँ उन सपनो के पूरा होने पर, मेरी हालत कैसी होगी,

ये सोच-सोच कर मरते-मरते जीते हैं,
यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं, 
यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं | 

यश पाल सिंह 
२५/१०/२०१७ ११:०१ रात्रि 

Life & Perspectives , , ,

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