मेरे मन को कुछ ऐसा बनाया होता,
की जैसा मैं नींद में सोया हूँ,
कुछ ऐसा ही मैंने जीवन पाया होता,
न बैर किसी से, ना जीने की उलझने,
ना साजिशे दुनिया की, ना ही दौड़ किसी से,
बस मस्त मलंग जीवन मेरा होता,
एक मैं होता, और बस एक मेरा सपना होता.
चेहरे पे ना होती परेशानी की लकीरें,
मन में न होता असफलताओं का डर,
ना वास्ता होता दुनिया के रीती रिवाजों से,
ना दुःख कल का, ना होती फ़िक्र कल से,
बस मस्त मलंग जीवन मेरा होता,
एक मैं होता और एक बस एक मेरा सपना होता.
सिर्फ उस एक सपने की दुनिया मेरी होती,
बस उसी सपने को पूरा करने की चाहत मेरी होती,
वो सपना रहता हर पल मेरी आँखों में,
उसी से मेरी सुबह शाम होती,
बस मस्त मलंग जीवन मेरा होता,
एक मैं होता और एक बस मेरा सपना होता….
०८-१०-१२ यश पाल सिंह