My Hindi Poem 11: मेरे शहर में लोग चेहरे पे हज़ार चेहरे लगाए बैठे हैं

मेरे शहर में लोग चेहरे पे हज़ार चेहरे लगाए बैठे हैं,कुछ घर की दिक्कत दिखा बाहर वालों को ठगते हैं,कुछ बाहर की दिक्कत दिखा घर वालों को ठगते हैं,अजीब पेशा अपनाया लोगों ने,मर्ज ठीक करने वाले यहाँ दर्द बांटते फिरते…