My Hindi poem 13: मैं तो खुद तेरे सा अच्छा बनना चाहूँ

मैं कैसे तुझे अपना सा बनाना चाहूँ, जब मैं खुद तुझ सा बनना चाहता हूँ,
तेरे आगे मैं कितना बुरा हूँ, मैं तो खुद तेरे सा अच्छा बनना चाहूँ,

तू बुरा न किसी बात का माने, तू ना किसी को पराया माने,
तू एक बात पर रोकर, दूजी किसी बात पर अगले पल हंसना जाने,
तू बेहता है पानी जैसा, ना किसी बात पर रुकना जाने,

लोग कहते हैं तू थोड़ा शरारती है, पर मुझे तो तुझसे इस दुनिया में न कोई सच्चा लागे,
तुझे देख देख कर सीख रहा हूँ मैं बहुत कुछ, मैं तुझसा बनने की कोशिश करना चाहूँ,

तुझे देख कर सोचता हूँ, अभी और कितना मुझे अच्छा बनना होगा,
तू इतना निर्मल, इतना सच्चा, की तेरे आगे तो मुझे दूध भी खारा लागे,

हे भगवन हाथ जोड़कर प्रार्थना तुझसे, मुझे मेरे बच्चे के जैसा मन दे दो,
ना मैं रहूं किसी बुराई से जुड़ा, बस ऐसी अपनी भक्ति दे दो,

मेरा मन बने एक छोटे से बच्चे की तरह, छोटी छोटी बातों पर खुश,
और बुरी बातों को मैं रोकर भुला दूँ, मैं रहूं इस दुनिया में खुली किताब की तरह,

मन की मलिनता को मैं हटा दूँ, मेरी आँखों में बस प्यार और मासूमियत रहे,
न रहे अपने और पराये की समझ, बस भगवन तुझसे एहि है प्रार्थना,
की जैसा बनाया तूने एक बच्चे को, कुछ वैसी ही मेरी भी सीरत रहे |

यश ने लिखी
अपने बेटे रुद्रा को समझकर
और कब लिखी
०८-०६-२०२१

Life & Perspectives , , , , ,

Discover more from Logic Searcher

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading