ना जाने क्यों हम कुछ लिखते वक़्त उसको पढ़ने वालों के बारे में सोचते हैं,जब भी कुछ करना चाहते हैं तो उस काम को देखने वालों के बारे में सोचते हैं,कुछ बुरा करो तो ये सोचना जायज़ भी है,हम लोग तो…
Read More My Hindi Poem 2: – ना जाने क्यों |
….break it…until you understand it…
ना जाने क्यों हम कुछ लिखते वक़्त उसको पढ़ने वालों के बारे में सोचते हैं,जब भी कुछ करना चाहते हैं तो उस काम को देखने वालों के बारे में सोचते हैं,कुछ बुरा करो तो ये सोचना जायज़ भी है,हम लोग तो…
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यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते सालों साल परिश्रम करते हैं रोते हैं, नींद खोते हैंलड़ते लड़ते जीते हैं यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं यूँ ही तो सपने पूरे नहीं होते हैं कई बार…