मेरे मन को कुछ ऐसा बनाया होता,की जैसा मैं नींद में सोया हूँ,कुछ ऐसा ही मैंने जीवन पाया होता,न बैर किसी से, ना जीने की उलझने,ना साजिशे दुनिया की, ना ही दौड़ किसी से,बस मस्त मलंग जीवन मेरा होता,एक मैं होता,…
Read More My Hindi Poem 3: मन को कुछ ऐसा बनाया होता